
Modi silent against Trump has sparked major debates across social media and political circles. Many analysts and observers are questioning why the Indian Prime Minister has remained quiet despite controversies surrounding US-India relations, corporate influence, and international diplomatic pressures. In this article, we explore 5 shocking reasons behind this silence, including the role of billionaires, strategic oil trade deals, think tanks, and the impact on Modi’s political image.
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ऑपरेशन सिंदूर और मोदी जी की इमेज
22 अप्रैल के आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इस ऑपरेशन ने प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और राजनीतिक नेतृत्व को मज़बूत बनाया। लेकिन इसके तुरंत बाद सीजफायर की घोषणा हुई और अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह उनकी मध्यस्थता से हुआ।
विपक्ष का सवाल
विपक्ष ने मोदी सरकार से पूछा कि अगर सीजफायर ट्रंप की वजह से हुआ तो भारत की विदेश नीति कितनी स्वतंत्र है? यह सवाल मोदी जी की इमेज पर गहरे असर डाल गया।
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विदेश नीति पर विवाद और अमेरिका का दबाव
ट्रंप के बयान के बाद पीएम मोदी ने लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी। जैसे ही मोदी ने संसद में यह कहा कि भारत किसी के दबाव में काम नहीं करता, अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर प्रतिबंध जड़ दिए।
अंबानी और रूस से तेल का व्यापार

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदा।
- इस कच्चे तेल को जामनगर रिफाइनरी जैसी निजी रिफाइनरियों ने प्रोसेस किया।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने तेल से 16 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त मुनाफा कमाया।
- इसमें से लगभग 6 बिलियन डॉलर का लाभ रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को हुआ।
यानी तेल खरीद और पुनः निर्यात से सबसे ज्यादा फायदा कॉर्पोरेट घरानों को हुआ, और इन्हीं व्यापारिक लाभों ने विदेश नीति पर प्रभाव डालने का शक पैदा किया।
ORF (Observer Research Foundation) का रोल
विदेश नीति से जुड़े इस पूरे मामले में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) का नाम भी चर्चा में है।
- ORF एक थिंक टैंक है, जो रायसीना डायलॉग जैसे बड़े कार्यक्रम आयोजित करता है।
- ORF की फंडिंग का बड़ा हिस्सा रिलायंस से आता है।
- इसकी ग्लोबल एडवाइजरी और ट्रस्टी बोर्ड में रिलायंस से जुड़े नाम भी शामिल हैं।
ध्रुव जयशंकर का कनेक्शन
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बेटे ध्रुव जयशंकर ORF में अमेरिका इनिशिएटिव के प्रमुख रहे हैं।
- वे वॉशिंगटन डीसी में भारत-अमेरिका संबंधों पर सक्रिय रहे।
- इस वजह से यह सवाल उठता है कि विदेश नीति और कॉर्पोरेट हितों के बीच कहीं न कहीं गहरा संबंध तो नहीं?
ट्विटर ट्रेंड और नैरेटिव वॉर
ट्विटर पर अचानक छिड़ी बहस यह संकेत देती है कि मोदी जी की चुप्पी और बाद के फैसले उनके ही सलाहकारों और करीबी सहयोगियों की वजह से प्रभावित हुए।
- सोशल मीडिया पर यह नैरेटिव गढ़ा गया कि प्रधानमंत्री को जिन लोगों ने चुप कराया, वही असल में धोखा देने वाले हैं।
- इस बहस ने अंबानी और विदेश मंत्री से लेकर थिंक टैंक्स तक कई परतें खोल दीं।
विपक्ष और शशि थरूर की एंट्री?
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि इस विवाद से शशि थरूर जैसे नेताओं को लाभ मिल सकता है।
- थरूर पहले भी विदेश राज्य मंत्री रह चुके हैं।
- बीजेपी अगर उन्हें शामिल करती है तो विदेश नीति में एक नई दिशा मिल सकती है।
Modi silent against Trump
“मोदी जी के साथ धोखा” वाला ट्विटर नैरेटिव केवल एक ट्रेंड नहीं है। यह विदेश नीति, कॉर्पोरेट हितों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच गहराते रिश्तों को उजागर करता है।
- ऑपरेशन सिंदूर ने जहां मोदी की छवि को चमकाया, वहीं ट्रंप के दावों और अमेरिकी दबाव ने उसे कमजोर किया।
- रूस से तेल व्यापार और उससे जुड़े मुनाफे ने कॉर्पोरेट-राजनीति कनेक्शन पर सवाल उठाए।
- ORF और ध्रुव जयशंकर के जरिए विदेश नीति पर असर डालने की चर्चाओं ने बहस को और गहरा किया।Modi silent against Trump
यह स्पष्ट है कि राजनीति में उठने वाले ऐसे सवाल केवल सोशल मीडिया के ट्रेंड नहीं होते, बल्कि इनके पीछे कई स्तरों पर छिपा हुआ गेम ऑफ नैरेटिव्स चलता है।Modi silent against Trump