Cheteshwar Pujara Retirement की खबर ने भारतीय क्रिकेट जगत को भावुक कर दिया। पुजारा, जिन्हें टेस्ट क्रिकेट की “नई दीवार” कहा जाता था, ने 103 टेस्ट खेलने के बाद आखिरकार संन्यास ले लिया।

भारतीय टेस्ट क्रिकेट का वह भरोसेमंद चेहरा, जिसने सालों तक टीम इंडिया की बल्लेबाज़ी को संबल दिया, आखिरकार मैदान से विदा ले चुका है। चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने रविवार को अपने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वह अब “भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों” से संन्यास ले रहे हैं।
37 वर्षीय पुजारा का यह फैसला भावनाओं से भरा हुआ है लेकिन साथ ही इसमें गहरी हताशा की झलक भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम इंडिया से बाहर होने और फिर वेस्ट ज़ोन की दलीप ट्रॉफी टीम में भी जगह न मिलने ने उनके रिटायरमेंट के फैसले को तेज़ कर दिया।
टेस्ट क्रिकेट में एक भरोसेमंद नाम
पुजारा ने अक्टूबर 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट से डेब्यू किया था। तब से लेकर 2023 तक उन्होंने 103 टेस्ट मैच खेले और 7195 रन बनाए। उनका औसत 43.60 रहा, जिसमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं।
भारत के लिए वह लंबे समय तक नंबर-3 बल्लेबाज़ की भूमिका निभाते रहे, ठीक उसी जगह जहाँ कभी राहुल द्रविड़ खेला करते थे। यही वजह है कि उन्हें “नई दीवार” कहा जाने लगा।
2018-19 की ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज़ उनकी करियर की सबसे यादगार झलक रही, जब उन्होंने चार मैचों में 521 रन बनाकर भारत को ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज़ जिताई।
“Cheteshwar Pujara Retirement के साथ भारतीय क्रिकेट को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उन्होंने 7195 रन बनाए।”
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रिटायरमेंट का असली कारण क्या रहा?
हालांकि पुजारा अभी भी घरेलू क्रिकेट और काउंटी क्रिकेट खेल रहे थे, लेकिन उनकी लगातार अनदेखी ने उनके मनोबल को गहरी चोट पहुंचाई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पुजारा को इंग्लैंड दौरे के लिए टीम इंडिया में चुना जाता, तो शायद वह पांचवे टेस्ट के बाद संन्यास लेते। लेकिन टेस्ट टीम और दलीप ट्रॉफी – दोनों से बाहर होने पर उन्हें लगा कि अब आगे खेलने का कोई मतलब नहीं रह गया है।
एक सूत्र के हवाले से कहा गया –
“शायद अगर उन्हें इंग्लैंड सीरीज़ में मौका मिलता तो पुजारा वहीं विदा लेते। लेकिन टेस्ट और दलीप ट्रॉफी दोनों से बाहर होने के बाद उनके पास घरेलू क्रिकेट खेलने का भी कारण नहीं बचा।”
सच यह है कि पुजारा आईपीएल में भी नियमित चेहरा नहीं थे। 2010 से 2014 तक उन्होंने KKR, RCB और किंग्स XI पंजाब के लिए खेला, लेकिन बाद में सफेद गेंद क्रिकेट से उनका ताल्लुक लगभग खत्म हो गया।
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“Sachin Tendulkar ने Cheteshwar Pujara Retirement पर भावुक पोस्ट लिखी।”
पुजारा के संन्यास की खबर पर भारतीय क्रिकेट जगत भावुक हो उठा। उनके पुराने साथी और कोचों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सचिन तेंदुलकर ने लिखा –
“पुजारा, तुम्हें नंबर-3 पर आते देखना हमेशा भरोसा देता था। तुम्हारी तकनीक, धैर्य और दबाव में संयम ने टीम को मजबूती दी। 2018 ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ तुम्हारे बिना संभव ही नहीं थी।”
गौतम गंभीर (भारत के हेड कोच) ने लिखा –
“वह तब खड़े रहे जब तूफ़ान आया, उन्होंने तब लड़ाई लड़ी जब उम्मीदें टूट रही थीं। बधाई हो पुज्जी।”
युवराज सिंह का संदेश –
“एक ऐसा खिलाड़ी जिसने हमेशा दिल, दिमाग और शरीर देश के लिए समर्पित कर दिया। शानदार करियर के लिए बधाई पुज्जी।”
एक छोटे शहर से भारतीय क्रिकेट का शिखर
राजकोट के छोटे से शहर से आने वाले पुजारा का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने साल 2005 में सौराष्ट्र के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे अपनी मेहनत और रन बनाने की कला से उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई।
उनका कहना है –
“एक छोटे से शहर का बच्चा जब अपने माता-पिता के साथ भारतीय टीम का सपना देखता है, तो वह सोच भी नहीं सकता कि यह खेल उसे इतना कुछ देगा। मुझे गर्व है कि मैंने भारत और अपने राज्य का प्रतिनिधित्व किया।”
क्यों खास थे चेतेश्वर पुजारा?
- पारंपरिक बल्लेबाज़ी शैली – जब पूरी दुनिया टी20 और आक्रामक बल्लेबाज़ी की ओर झुक रही थी, पुजारा ने धैर्य और तकनीक से लाल गेंद क्रिकेट को जीवित रखा।
- नंबर-3 पर भरोसा – उन्होंने राहुल द्रविड़ की जगह भरते हुए टीम इंडिया को कई मुश्किल परिस्थितियों से निकाला।
- ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ प्रदर्शन – इन दोनों देशों के खिलाफ उन्होंने 5-5 शतक जड़े और हमेशा भारत के लिए संकटमोचक साबित हुए।
- धैर्य का प्रतीक – 2018-19 ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ में 1258 गेंदें खेलकर उन्होंने एक नया उदाहरण पेश किया।
भविष्य की राह
Cheteshwar Pujara Retirement:- हालांकि उन्होंने भारतीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है, लेकिन पुजारा का अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य होगा। वह पहले से ही कमेंट्री और क्रिकेट विश्लेषण में सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में वह कोचिंग और युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने की भूमिका भी निभा सकते हैं।
निष्कर्ष
Cheteshwar Pujara Retirement :- चेतेश्वर पुजारा का करियर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय रहेगा। उन्होंने दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ तेज़ रन बनाने का नाम नहीं है, बल्कि यह धैर्य, मानसिक मजबूती और टीम के लिए बलिदान की मिसाल है।
उनका संन्यास यह याद दिलाता है कि क्रिकेट बदल सकता है, फॉर्मेट बदल सकते हैं, लेकिन “दीवार” जैसी भूमिका निभाने वाले खिलाड़ी बार-बार नहीं आते।