Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025 me Commission ne ek historic positive announcement kiya jisme voter list update, Special Intensive Revision (SIR) aur transparency ke muddon par detailed discussion hua.

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी सबसे बड़ी ताकत है – मतदाता। जब-जब चुनाव होते हैं, तो करोड़ों भारतीय नागरिक मतदान करके लोकतंत्र को मजबूत करते हैं। इसी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) पर है।
हाल ही में निर्वाचन आयोग ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखवीर सिंह संधू, चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी तथा आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस प्रेस वार्ता का मुख्य फोकस था – मतदाता सूची (Electoral Roll) की शुद्धता, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आवश्यकता, और राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्पष्टीकरण।
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Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025 Main points
- ECI का पहला संदेश मतदाताओं के लिए
- हर भारतीय नागरिक जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, उसे अनिवार्य रूप से मतदाता बनना चाहिए और मतदान करना चाहिए।
- यह केवल अधिकार ही नहीं बल्कि संवैधानिक कर्तव्य भी है।
- राजनीतिक दलों के आरोपों पर जवाब
- आयोग ने कहा कि “चुनाव आयोग के लिए कोई विपक्ष या पक्ष नहीं होता, सभी दल समान हैं।”
- मतदाता सूची में त्रुटियों को सुधारने के लिए आयोग लगातार काम कर रहा है और सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी को शामिल किया गया है।
- स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की शुरुआत
- पिछले दो दशकों से राजनीतिक दल लगातार मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर शिकायतें कर रहे थे।
- इन्हीं शिकायतों के आधार पर बिहार से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू किया गया है।
- इस प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) और राजनीतिक दलों के बूथ एजेंट्स ने मिलकर ड्राफ्ट लिस्ट तैयार की।
- आंकड़े (Key Statistics)
- 1.6 लाख BLOs और BALAs ने मिलकर प्रारूप सूची बनाई।
- अब तक लगभग 28,370 क्लेम्स और ऑब्जेक्शंस प्राप्त हुए हैं।
- 1,33,703 नए मतदाताओं (18 वर्ष पूरे करने वाले) ने Form-6 भरकर रजिस्ट्रेशन किया है।
- समयसीमा और प्रक्रिया
- 1 अगस्त से 1 सितंबर तक त्रुटियों को सुधारने का समय निर्धारित है।
- राजनीतिक दलों और मतदाताओं से अपील है कि वे शेष 15 दिनों में अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराएँ।
- राजनीतिक दलों की भूमिका
- BLOs और राजनीतिक दलों द्वारा नामित एजेंट्स ने ड्राफ्ट सूची को हस्ताक्षर और वीडियो टेस्टिमोनियल्स के साथ सत्यापित किया है।
- आयोग ने कहा कि “जमीनी स्तर की सच्चाई को कुछ नेता नजरअंदाज कर रहे हैं और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।”
- ECI की दृढ़ता (Firm Stand of ECI)
- “जब 7 करोड़ से अधिक बिहार के मतदाता चुनाव आयोग के साथ खड़े हैं, तो आयोग की साख पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं लग सकता।”
- चुनाव आयोग किसी भी राजनीतिक दबाव में नहीं आएगा और संविधान के प्रति पूरी तरह निष्ठावान रहेगा।
Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025
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मतदाता सूची की प्रक्रिया और उसका महत्व
Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025 : भारत में चुनाव कराने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार है – मतदाता सूची (Electoral Roll)। अगर मतदाता सूची सटीक और पारदर्शी नहीं होगी तो चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। इसी कारण चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से बताया कि मतदाता सूची कैसे तैयार होती है और त्रुटियों को दूर करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जाते हैं।
मतदाता सूची की सामान्य प्रक्रिया
Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025 : मतदाता सूची (Voter List) तैयार करने और उसमें सुधार करने की एक कानूनी प्रक्रिया है, जो Representation of the People Act के अंतर्गत होती है।
1. प्रारूप सूची (Draft Roll)
- सबसे पहले Booth Level Officer (BLO) और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स मिलकर एक प्रारूप सूची (Draft Electoral Roll) तैयार करते हैं।
- इस सूची को संबंधित विधानसभा क्षेत्र की सभी राजनीतिक पार्टियों और मतदाताओं के साथ साझा किया जाता है।
2. क्लेम्स और ऑब्जेक्शंस (Claims & Objections)
प्रारूप सूची पर मतदाता और राजनीतिक दल तीन प्रकार से आवेदन कर सकते हैं:
- Form 6 – अगर किसी मतदाता का नाम सूची में छूट गया है।
- Form 7 – अगर किसी का नाम गलत जुड़ गया है या किसी अन्य व्यक्ति को हटाना है।
- Form 8 – अगर विवरण गलत है (जैसे नाम की स्पेलिंग, फोटो, पता आदि)।
3. SDM/ERO की भूमिका
- आवेदन मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र का SDM (Sub-Divisional Magistrate) या Electoral Registration Officer (ERO) इन क्लेम्स और ऑब्जेक्शंस पर निर्णय लेता है।
- इसके बाद एक अंतिम मतदाता सूची (Final Roll) प्रकाशित की जाती है।
4. अपील की प्रक्रिया
अगर अंतिम सूची में भी त्रुटि रह जाए तो –
- सबसे पहले जिला निर्वाचन अधिकारी (DM/DEO) के पास अपील की जा सकती है।
- इसके बाद राज्य के Chief Electoral Officer (CEO) तक अपील की जा सकती है।
5. चुनाव के समय मतदाता सूची
- जब चुनाव घोषित होते हैं तो यही Final Electoral Roll उम्मीदवारों और उनके पोलिंग एजेंट्स को दी जाती है।
- मतदान के समय हर मतदाता को उसी सूची से सत्यापित किया जाता है।
Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आवश्यकता
सामान्य परिस्थितियों में हर साल मतदाता सूची का Annual Revision होता है। लेकिन आयोग ने इस बार बिहार से Special Intensive Revision (SIR) शुरू किया है।
सामान्य संशोधन (Annual Revision)
- इसमें केवल Absentee, Shifted, Dead Voters और कुछ रैंडम चेकिंग होती है।
- साधारण तरीके से त्रुटियों को ठीक किया जाता है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)
- इसमें मतदाता सूची का पूर्ण शुद्धिकरण (Purification) किया जाता है।
- Door-to-Door Verification कराया जाता है।
- हर मतदाता को एक Enumeration Form भरना होता है।
- इस प्रक्रिया में मतदाता का नाम, फोटो, पता, माता-पिता का नाम, उम्र आदि सभी डिटेल्स को नए सिरे से सत्यापित किया जाता है।
SIR क्यों ज़रूरी पड़ा?
1. राजनीतिक दलों की शिकायतें
पिछले 20 सालों से लगभग सभी राजनीतिक दल शिकायत करते रहे हैं कि –
- कहीं पर वोट बढ़ा दिए जाते हैं,
- कहीं पर वोट कट जाते हैं,
- कहीं मृत व्यक्ति के नाम सूची में बने रहते हैं,
- कई लोगों का नाम दो जगह सूची में आ जाता है।
2. पलायन और शहरीकरण
- बहुत से लोग गाँव से शहर और फिर दूसरे शहरों में जाते हैं।
- कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण उनका नाम पुराने स्थान पर भी रह जाता है और नए स्थान पर भी जुड़ जाता है।
- परिणामस्वरूप डुप्लीकेट वोटर लिस्टिंग हो जाती है।
3. नामों की गड़बड़ियाँ
- कई बार एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नाम से वोट दर्ज हो जाते हैं।
- उदाहरण: श्रीपर्णा चक्रवर्ती, S. चक्रवर्ती, अखिल बी. चक्रवर्ती – यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि ये एक ही व्यक्ति हैं या तीन अलग लोग।
SIR की विशेषताएँ
- 90 हजार BLOs ने बिहार में 7 करोड़ 89 लाख लोगों के घर-घर जाकर Enumeration Forms दिए।
- 30 दिन के अंदर 7 करोड़ 24 लाख फॉर्म वापस मिले।
- जो लोग मृत थे या स्थायी रूप से शिफ्ट हो गए थे, उनके फॉर्म वापस नहीं आए।
- इसका मतलब यह प्रक्रिया मतदाता सूची की शुद्धता (Purity) को अधिकतम स्तर तक ले जाने का प्रयास है।
Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025 :- पत्रकारों के सवाल और आयोग के जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पत्रकारों ने चुनाव आयोग से कई तीखे सवाल पूछे। मुख्य सवाल ये थे:
1. क्या वोटर की प्राइवेसी खतरे में है?
पत्रकारों ने पूछा कि घर-घर जाकर वोटरों से Enumeration Form भरवाने का मतलब है कि अब हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी चुनाव आयोग के पास होगी।
- क्या यह Right to Privacy का उल्लंघन नहीं है?
- क्या इस डेटा का दुरुपयोग राजनीतिक दल कर सकते हैं?
आयोग का जवाब
- यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी और सुरक्षित है।
- BLO केवल वही जानकारी लेते हैं जो पहले से मतदाता सूची में दर्ज है।
- नया कुछ नहीं लिया जा रहा, बल्कि केवल पुराने रिकॉर्ड को सत्यापित (verify) किया जा रहा है।
- सभी डेटा का डिजिटल सुरक्षा तंत्र (cyber security system) बनाया गया है ताकि कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति इसका गलत इस्तेमाल न कर सके।
2. क्या SIR का राजनीतिक दलों ने दुरुपयोग किया?
कुछ पत्रकारों ने सवाल किया कि क्या यह प्रक्रिया किसी खास राजनीतिक दल के दबाव में शुरू की गई है, ताकि वोट काटे जा सकें या बढ़ाए जा सकें।
आयोग का जवाब
- SIR पिछले 20 सालों से चली आ रही शिकायतों के समाधान के लिए शुरू की गई है।
- हर राजनीतिक दल ने समय-समय पर मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत की है।
- इसलिए यह प्रक्रिया किसी एक दल के लिए नहीं, बल्कि सभी दलों और मतदाताओं के हित में की गई है।
- आयोग ने साफ कहा: “हम चुनाव कराते हैं, राजनीति नहीं।”
3. क्या एक व्यक्ति का नाम दो जगह रह सकता है?
पत्रकारों ने पूछा कि जब लोग शहर बदलते हैं तो उनका नाम पुराने स्थान पर भी रहता है और नए स्थान पर भी जुड़ जाता है।
- क्या SIR इस समस्या को पूरी तरह खत्म कर पाएगा?
आयोग का जवाब
- यह समस्या स्वीकार की गई।
- आयोग ने बताया कि डुप्लीकेट नाम हटाने के लिए Artificial Intelligence (AI) और De-duplication Software का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- जिन मामलों में स्पेलिंग अलग-अलग होती है, वहाँ Manual Verification भी किया जा रहा है।
- SIR का मुख्य लक्ष्य ही है कि एक नागरिक का केवल एक ही वोट रहे।
4. क्या बूथ लेवल अफसर (BLO) पक्षपाती हो सकते हैं?
पत्रकारों ने शंका जताई कि BLO कई बार किसी पार्टी या स्थानीय नेता के दबाव में काम करते हैं।
आयोग का जवाब
- BLO का काम केवल डेटा कलेक्शन है, अंतिम निर्णय SDM/ERO लेते हैं।
- सभी BLO पर जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी होती है।
- इस बार आयोग ने Random Checks और Third-party Audit की व्यवस्था भी की है ताकि BLO की रिपोर्ट को क्रॉस-चेक किया जा सके।
राजनीतिक आरोप और आयोग का रुख
Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025 :- भारत में चुनाव आते ही राजनीतिक दल चुनाव आयोग पर आरोप लगाने लगते हैं। इस बार भी वही हुआ।
1. आरोप: मतदाता सूची में गड़बड़ी
- विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में Dead Voters और Duplicate Names जानबूझकर रखे जाते हैं।
- सत्ताधारी दल का आरोप है कि विपक्ष Bogus Voters बनवाता है।
आयोग का रुख
- आयोग ने कहा कि दोनों ही आरोपों की वजह से SIR जरूरी हो गया था।
- इस प्रक्रिया से सभी नकली और दोहरे वोटरों को हटाया जाएगा।
2. आरोप: प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा
- कुछ दलों का आरोप है कि Enumeration Forms से व्यक्तिगत जानकारी लीक हो सकती है।
आयोग का रुख
- डेटा केवल चुनाव प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल होगा।
- किसी भी राजनीतिक दल या बाहरी संस्था को Data Access नहीं दिया जाएगा।
3. आरोप: पक्षपातपूर्ण कार्यवाही
- आरोप लगा कि आयोग किसी एक दल के लिए काम करता है।
आयोग का रुख
- आयोग ने साफ शब्दों में कहा:
“हमारा काम केवल निष्पक्ष चुनाव कराना है। किसी भी राजनीतिक दल के लिए या खिलाफ हमारा कोई रुख नहीं है।”
Bharat Nirvachan Aayog Press Conference 2025
- चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य संदेश था कि भारत में मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाया जाएगा।
- इसके लिए पहली बार Special Intensive Revision (SIR) शुरू किया गया है।
- पत्रकारों और राजनीतिक दलों की शंकाओं का जवाब आयोग ने साफ और पारदर्शी ढंग से दिया।