PM Modi Manipur Visit 2025 ने मणिपुर की राजनीति और शांति प्रक्रिया को एक नया मोड़ दिया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2023 के जातीय संघर्ष के बाद पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने इंफाल और चुराचांदपुर में ₹8,500 करोड़ की ऐतिहासिक परियोजनाओं की घोषणा की, आंतरिक रूप से विस्थापित परिवारों से मुलाकात की और शांति एवं विकास का भरोसा दिलाया।

क्यों अहम है PM Modi Manipur Visit 2025?
₹8,500 करोड़ की परियोजनाएं: PM Modi Manipur Visit 2025 का बड़ा ऐलान
आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से मुलाकात – PM Modi Manipur Visit 2025
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प्रस्तावना: पीएम मोदी मणिपुर दौरा 2025
पीएम मोदी मणिपुर दौरा 2025 को लेकर पूरे राज्य में उत्सुकता और उम्मीद का माहौल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को पहली बार उस राज्य की यात्रा की, जहाँ मई 2023 में जातीय संघर्ष ने गहरी चोट पहुँचाई थी। इस संघर्ष ने मणिपुर की सामाजिक संरचना, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक माहौल को बुरी तरह प्रभावित किया।
यह दौरा न सिर्फ राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था बल्कि यह राज्य की शांति बहाली, विकास और सामाजिक समरसता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस दौरान ₹8,500 करोड़ की परियोजनाओं की घोषणा की, राहत शिविरों में रह रहे विस्थापितों से सीधे संवाद किया और मणिपुर के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
इंफाल और चुराचांदपुर में भव्य स्वागत
चुराचांदपुर की तैयारी
- चुराचांदपुर, जहाँ मुख्य रूप से कुकी-ज़ो समुदाय रहते हैं, वहाँ प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक स्वागत हुआ।
- पीस ग्राउंड के रास्तों को तिरंगे और पोस्टरों से सजाया गया।
- नागरिक समाज संगठनों ने लोगों से पारंपरिक पोशाक पहनकर प्रधानमंत्री का स्वागत करने की अपील की।
इंफाल की सजावट और मिश्रित प्रतिक्रिया
- राज्य की राजधानी इंफाल में कांगला किला से एयरपोर्ट तक 7 किमी का रास्ता पीएम मोदी के पोस्टर और बैनरों से भरा रहा।
- मैतेई समुदाय के लोगों ने स्वागत किया लेकिन कई लोग परिणामों को लेकर अभी भी संशय में रहे।
- सुरक्षा के लिहाज से हर 100 मीटर पर सुरक्षाबल तैनात किए गए।
आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से संवाद
2023 के संघर्ष में लगभग 60,000 लोग विस्थापित हो गए थे और अब भी हज़ारों लोग राहत शिविरों में जीवन काट रहे हैं।
पीएम मोदी मणिपुर दौरा 2025 का सबसे भावनात्मक हिस्सा तब रहा जब प्रधानमंत्री ने इन विस्थापित परिवारों से सीधा संवाद किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि—
- पुनर्वास योजनाओं में तेजी लाई जाएगी।
- राहत शिविरों में रह रहे लोगों को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।
- शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएँगे।
₹8,500 करोड़ की विकास परियोजनाएँ
प्रधानमंत्री ने मणिपुर को समग्र विकास और शांति के रास्ते पर ले जाने के लिए ₹8,500 करोड़ की योजनाओं की घोषणा की।
चुराचांदपुर में ₹7,300 करोड़ की योजनाएँ
- मणिपुर अर्बन रोड्स, ड्रेनेज और एसेट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट – ₹3,600 करोड़
- 5 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ – ₹2,500 करोड़
- मणिपुर इन्फोटेक डेवलपमेंट (MIND) प्रोजेक्ट
- 9 स्थानों पर कार्यरत महिलाओं के लिए छात्रावास
इंफाल में ₹1,200 करोड़ की योजनाएँ
- मंत्रिपुखरी में नया सिविल सचिवालय
- आईटी एसईजेड बिल्डिंग और नया पुलिस मुख्यालय
- दिल्ली और कोलकाता में मणिपुर भवन
- चार जिलों में इमा मार्केट (महिला बाजार)
इन योजनाओं से रोजगार, डिजिटल विकास, सड़क नेटवर्क और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और बहस
भाजपा का पक्ष
स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी मणिपुर दौरा 2025 से राज्य में विकास और शांति की नई उम्मीद जगी है।
कांग्रेस का रुख
मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे सिर्फ “प्रतीकात्मक दौरा” बताया और कहा कि जब तक ठोस शांति-रोडमैप नहीं बनेगा, तब तक जनता की पीड़ा कम नहीं होगी।
कुकी-ज़ो काउंसिल की प्रतिक्रिया
कुकी-ज़ो काउंसिल ने इसे “नई उम्मीद और पहचान का अध्याय” बताया और लोगों से एकजुट होकर प्रधानमंत्री का स्वागत करने का आह्वान किया।
सुरक्षा और शांति की स्थिति
- संघर्ष के दौरान लूटे गए 6,000 पुलिस हथियारों में से 4,200 बरामद किए जा चुके हैं।
- गाँवों में बनाए गए बंकरों को हटाया गया।
- बफर जोन में केंद्रीय सुरक्षाबल तैनात हैं ताकि दोबारा हिंसा न भड़के।
पीएम मोदी मणिपुर दौरा 2025: दौरे का महत्व
- 28 महीनों बाद प्रधानमंत्री की पहली यात्रा।
- दोनों समुदायों (मैतेई और कुकी-ज़ो) तक सीधा संदेश।
- विकास आधारित शांति की रणनीति।
- राहत शिविरों में रह रहे लोगों को आश्वासन।
- अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित करना।
निष्कर्ष: उम्मीदें और चुनौतियाँ
पीएम मोदी मणिपुर दौरा 2025 मणिपुर के लिए एक नया मोड़ है। ₹8,500 करोड़ की योजनाओं और शांति के संदेश से जनता की उम्मीदें बढ़ी हैं।
लेकिन असली चुनौती यह होगी कि—
- क्या विकास परियोजनाएँ जातीय विभाजन को कम कर पाएंगी?
- क्या विस्थापित लोग अपने घरों को लौट पाएंगे?
- क्या राजनीतिक दल मिलकर शांति का माहौल बना पाएंगे?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा मणिपुर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगी।




