Russia Breaks INF Treaty — यह खबर 2025 की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक घटनाओं में गिनी जा रही है। रूस द्वारा INF संधि को तोड़कर अमेरिका को परमाणु चेतावनी देना न केवल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि वैश्विक व्यापार तनाव को भी चरम पर ले जाता है। अमेरिका-रूस संबंधों में बढ़ते तनाव के साथ पूरी दुनिया एक नई शीत युद्ध की संभावना की ओर देख रही है।

Russia Breaks INF Treaty :- क्या है INF संधि और क्यों है यह अहम?
Intermediate-Range Nuclear Forces Treaty यानी INF संधि, 1987 में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच एक ऐतिहासिक समझौता था। इस संधि के तहत दोनों देश 500 से 5,500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने वाले जमीन से लॉन्च किए जाने वाले बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों को खत्म करने पर सहमत हुए थे। इसने शीत युद्ध के दौरान परमाणु हथियारों की दौड़ पर एक बड़ा ब्रेक लगाया था।
लेकिन अब, अगस्त 2025 में, रूस ने इस संधि से पूरी तरह खुद को अलग कर लिया है और संकेत दिया है कि वह फिर से ऐसे हथियार तैनात कर सकता है।
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1. रूस ने क्यों छोड़ी INF संधि?
रूस के विदेश मंत्रालय ने 5 अगस्त 2025 को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अब वह INF संधि के अंतर्गत किसी भी प्रकार की पाबंदियों को मानने को बाध्य नहीं है। रूस का तर्क है कि अमेरिका पहले ही यूरोप और एशिया में इंटरमीडिएट-रेंज मिसाइलों की तैनाती कर चुका है, जिससे उसकी सुरक्षा को सीधा खतरा है।
पेस्कोव की चेतावनी:
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, “अब रूस के लिए कोई सीमा नहीं बची है। यदि आवश्यक हुआ तो हम उपयुक्त जवाब देंगे।”
2. ट्रंप की भूमिका: क्यों बढ़ा अमेरिका-रूस तनाव?Russia Breaks INF Treaty
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सप्ताह पहले रूस पर नई सख्त पाबंदियों का ऐलान किया था और साथ ही दो अमेरिकी परमाणु पनडुब्बियों को “उचित क्षेत्रों” में तैनात करने का आदेश दिया था।
यह आदेश उस समय आया जब ट्रंप और रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बीच सोशल मीडिया पर तीखा विवाद हुआ।
मेदवेदेव ने दी चेतावनी:
मेदवेदेव ने लिखा:
“हर नया अल्टीमेटम युद्ध की ओर एक कदम है। रूस इज़राइल या ईरान नहीं है। ट्रंप को सोचना चाहिए कि वह ‘Sleepy Joe’ की राह पर ना चलें।”
3. क्या है INF संधि का इतिहास?
1987 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने INF Treaty पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि ने 2,692 परमाणु मिसाइलों के निष्कासन का मार्ग प्रशस्त किया।
INF संधि पहली बार थी जब दोनों महाशक्तियों ने अपने परमाणु जखीरे को घटाने और पारदर्शिता के लिए ऑन-साइट निरीक्षण को भी स्वीकार किया।
संधि का पतन कैसे हुआ?
- 2014: अमेरिका ने रूस पर पहली बार INF संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
- 2017: अमेरिका ने कहा कि रूस ने प्रतिबंधित मिसाइलें तैनात कर दी हैं।
- 2019: ट्रंप प्रशासन ने संधि से बाहर निकलने की घोषणा की।
रूस ने उस समय कहा था कि वह तब तक ऐसे हथियार नहीं तैनात करेगा जब तक अमेरिका ऐसा नहीं करता।
4. भारत और चीन पर ट्रंप का दबाव in Russia Breaks INF Treaty
ट्रंप ने पिछले हफ्ते घोषणा की कि यदि रूस 8 अगस्त तक युद्ध विराम के लिए सहमत नहीं होता, तो भारत और चीन जैसे देशों पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे जो रूसी तेल खरीद रहे हैं।
भारत पर असर:
- ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 25% का नया टैरिफ लागू कर दिया है।
- रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में रूस से आयात पर भी “अनिर्दिष्ट दंड” लगाने की घोषणा की गई है।
भारत ने इन प्रतिबंधों को “अनुचित और अस्वीकार्य” बताया है।
5. भारत की प्रतिक्रिया और ऊर्जा नीति
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि भारत का उद्देश्य सिर्फ़ “सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति” सुनिश्चित करना है।
भारत सरकार ने यह भी उजागर किया कि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन खुद भी अब भी रूस से व्यापार कर रहे हैं।
MEA का बयान:
“यह एक नया औपनिवेशिक प्रयास है जिसमें केवल कुछ देश वैश्विक व्यवस्था पर नियंत्रण रखना चाहते हैं।”
6. कौन हैं रूस से सबसे बड़े तेल खरीददार?
देश | अनुमानित आयात (2022-2025) |
---|---|
चीन | $219.5 बिलियन |
भारत | $133.4 बिलियन |
तुर्की | $90.3 बिलियन |
यूरोपीय यूनियन द्वारा जनवरी 2023 में रूसी तेल के बहिष्कार के बाद एशियाई देशों की भूमिका और बढ़ गई है।
7. अमेरिका की दोहरी नीति?
हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अमेरिका के रूस से आयात में 23% की बढ़ोतरी हुई है। इसमें प्रमुख वस्तुएं रही:
- पैलेडियम (37%)
- यूरेनियम (28%)
- उर्वरक (21%)
इससे भारत ने अमेरिका की नीति को “पाखंडी” और “एकपक्षीय” करार दिया है।
8. क्या रूस परमाणु मिसाइलें तैनात करेगा?
पुतिन पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि रूस अब फिर से मिड-रेंज परमाणु मिसाइलों का निर्माण शुरू करेगा। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि:
- मिसाइलें यूरोप की सीमाओं पर तैनात हो सकती हैं।
- ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस में अमेरिकी अभ्यास को रूस ने सीधे खतरे के रूप में देखा है।
पेस्कोव ने यह भी कहा कि यदि रूस मिसाइल तैनात करता है, तो सार्वजनिक घोषणा नहीं की जाएगी।
9. विशेषज्ञों की राय: Russia Breaks INF Treaty ! क्या परमाणु युद्ध का खतरा है?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि INF संधि का टूटना वैश्विक सुरक्षा ढांचे के लिए एक गंभीर झटका है। यह दो बातों को दर्शाता है:
- परमाणु हथियारों का फिर से सामान्यीकरण होना।
- अमेरिका-रूस के बीच आपसी विश्वास का अभाव।
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10. Russia Breaks INF Treaty आगे क्या?
INF संधि से रूस के बाहर निकलने से दुनिया एक बार फिर शीत युद्ध जैसे माहौल में प्रवेश करती दिख रही है। अमेरिका और रूस के बीच परस्पर अविश्वास, ट्रंप की आक्रामक नीतियां, और चीन-भारत जैसी उभरती शक्तियों पर दबाव – सब मिलकर एक अस्थिर वैश्विक परिदृश्य बना रहे हैं।
भारत के लिए अब बड़ी चुनौती है — स्वतंत्र विदेश नीति को कायम रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा हितों की रक्षा करना।